Motions

Semifinals

  • 1
    समाजशास्त्रियों का यह सदन उपरोक्त पृथकतावाद की नीति को सामाजिक विघटन का कारक माने जाने का समर्थन करता है।
  • 2
    समाजशास्त्रियों का सदन समाज द्वारा उच्चतम प्रगति स्तर की प्राप्ति हेतु "Iron Cage' की अवधारणा का सामान्यीकरण अनिवार्य मानता है।
  • 3
    यह सदन यह मानता है कि दैनिक जीवन मौलिक रूप से प्रदर्शनकारी (performative) है, और सामाजिक भूमिकाओं से परे एक 'वास्तविक स्व' (real self) का विचार मात्र एक भ्रम है|
  • Quarterfinals

  • 1
    बुद्धिजीवियों के सदन का मत है कि चंदर के अवचेतन द्वारा स्वयं उसकी ही साधना की भर्त्सना केवल परिस्थितिजन्य पीड़ा को तर्कसंगत बनाने का प्रयास मात्र है।
  • 2
    बुद्धिजीवियों का यह सदन मानता है कि व्यक्ति द्वारा चयनित आत्म-निरोध (self censorship) के माध्यम से उत्पन्न स्वत्व-लोप (self erosion) ने ही व्यक्ति का मौलिक रंग छीना हैं।
  • 3
    प्रेमियों के सदन का मत है कि प्रेम की नियति के संदर्भ में रिक्तता प्रेम की पूर्णता का प्रतिबिंब है।
  • Round 3

  • 1
    दार्शनिकों के सदन का मत है कि यथार्थ के बोध से मुक्त "मानसिक स्वच्छंदता" की संकल्पना एक मिथ्या हैं।
  • 2
    दार्शनिकों के सदन का मत है कि नैतिकता की प्रेरक शक्ति मानव में निहित प्राकृतिक अनुग्रह नहीं अपितु प्रगतिशील स्वहित का पोषण करने की प्रवृत्ति है।
  • 3
    दार्शनिकों का यह सदन अस्तित्व के खोज के लिए एक मनुष्य की उत्कंठा को उसकी चेतना का मापदंड मानता है।
  • Round 2

  • 1
    बुद्धिजीवियों का यह सदन कर्ण को भुक्तभोगी नहीं अपितु स्वनिर्धारित संघर्ष में उन्मत्त व्यक्ति मानता है।
  • 2
    नारद के मन का सदन इस घटना के पश्चात श्री विष्णु को अपना आराध्य नहीं मानेगा।
  • 3
    बुद्धिजीवियों का यह सदन पौराणिक कथाओं के महिमामंडन हेतु कथन २ को १ की तुलना में अधिक उत्तरदायी मानता है।
  • Round 1

  • 1
    "Never outshine your master" बुद्धिजीवियों का यह सदन मानता है कि उपरोक्त सिद्धांत का लोकतांत्रिक परिप्रेक्ष्य में पालन राजनीतिक परिपक्वता की परिणति है।
  • 2
    यह सदन मानता है कि सामाजिक प्रगति, मार्गदर्शित एवं अनुभवजन्य नियम आधारित विकास की तुलना में मौलिक संघर्ष और "प्रतिद्वंद्वी विचारों" के माध्यम से अधिक प्रभावी ढंग से प्राप्त की जा सकती है।
  • 3
    बुद्धिजीवियों का यह सदन राजनीति को सांसारिक विषाद से भ्रमित करने हेतु अपनाई गयी सार्वभौमिक भ्रांति मानने का समर्थन करता है।